रविवार, २५ सप्टेंबर, २०१६

Gazal

ए सितमगर अब न आ ख्वाबोमेंभी तू,
अब महोब्बत होगई तनहाइयोसे!
प्यार का अंमल है हमपे आजभी यु,
खौफ लगता है तेरी परछाईयोसे!
तोड आये हम तो रसमोकी सलाखे,
तुम तो डरतेही रहे रुसवाइयोसे!
घर बसाना चाहतेथे रुहमे हम,
दिल को भी ना पा सके गहराइयोसे!